मैं पहली बार गुरूजी के बड़े मंदिर, 7 वर्ष पूर्व 2017 में गया और तब से निरंतर जाने लगा, इसकी वजह मन की शांति और वहाँ मिलने वाला प्रसाद था। 2019 में, न जाने कहाँ से, मेरे मोबाइल पर एक सत्संग आया जिसे मैंने सुना और उसी पल से जैसे मेरे मन के तार गुरूजी के साथ जुड़ गए और मैं उन्हें हृदय से चाहने लगा। मुझे स्वप्न में भी गुरूजी के दर्शन हुए और मैं एम्पायर एस्टेट भी गया। जल्द ही गुरूजी ने मुझे बड़े मंदिर में सेवा करने का सौभाग्य भी प्रदान किया।
3 साल बाद, एक दिन गुडगाँव में मेरी मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई, मुझे सिर और रीढ़ की हड्डी में बहुत चोट लगी। मेरी रीढ़ की हड्डी की शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) की गयी तथा मस्तिष्क की भी दो बार शल्य चिकित्सा हुई। मेरे फेफड़ों में भी पानी भर गया था और मुझे वेंटीलेटर पर रखा गया। मैंने 20 दिन चिकित्सालय में बिताये। उस समय, गुरूजी मुझे अपने हाथों में लेकर, इस प्रकार मेरी रक्षा कर रहे थे जैसे मैं कोई कोमल फूल हूँ।
मुझे याद नहीं की यह दुर्घटना कैसे हुई। किन्तु मुझे यह ध्यान है, जब मुझे चिकित्सालय लाया गया तब मैं हिलने-डुलने और बोलने में असर्मथ था, मैंने अर्धचैतन्य अवस्था में देखा कि नर्स आपस में बात कर रही हैं और कह रही हैं कि मेरी सांसे कभी भी रुक सकती है; मैं उनसे ऑक्सीजन माँगना चाहता था। मैंने तीन-चार बार साँस ली और मेरी मृत्यु हो गयी।
उसी समय गुरूजी मुझे स्वप्न में दिखाई दिए। मैंने देखा कि मैं अपनी पत्नी के साथ खड़ा हूँ और कहीं, "ब्लेससिंग्स ऑलवेज गुरूजी" लिखा हुआ है, और एक आदमी अपने नवजात शिशु को गोद में लिए हुए गुरूजी के बारे में बात कर रहा है। और फिर मैं जीवित हो गया।
गुरूजी की कृपा तब भी बनी रही, जब मैं दुर्घटना के परिणामस्वरूप होने वाले घावों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था।
पिछले वर्ष, मस्तिष्कमेरू द्रव्य (सेरेब्रोस्पइनल फ्लूएड) मेरे मस्तिष्क से रिसकर (लीक) मेरे नाक के रास्ते बाहर आने लगा। जिसके लिए मेरा एम आर आई हुआ, और परिणाम स्वरूप न्यूरोलाजिस्ट को मेरे मस्तिष्क के ऊतक (टिस्यू ) के बीच में अंतर मिला, जिसका एकमात्र उपाय उसके द्वारा शल्य चिकित्सा बताई गई। किन्तु जब पिछले महीने मैं मंदिर गया और मैंने लंगर प्रसाद खाया तब से मेरी यह परेशानी समाप्त हो गई। यह गुरूजी की सर्वशक्तिशाली और बहुत ही सुंदर कृपा है।
गुरूजी पुनः मेरी मदद के लिए तब आए, जब मुझे लगभग एक सप्ताह से सांस लेने मैं बहुत परेशानी हो रही थी। मैं सांस तो ले रहा था किन्तु वापस अगली सांस एक मिनट बाद ही भर पा रहा था; ऐसा दिन में दो बार हो रहा था। अगर अन्य शब्दों में अपनी परेशानी कहूँ तो -"घबराहट और बेचैनी होती थी"। इसके पहले कि मैं चिक्तिसक के पास परामर्श के लिए जाता या कोई दवाई लेता, मुझे स्वप्न मैं गुरूजी के दिव्य दर्शन हुए, गुरूजी मेरे हृदय को स्टैथौस्कोप से देख रहे थे और वही शब्द दोहरा रहे थे, "घबराहट और बेचैनी होती है" और उस दिन से मेरी श्वास की समस्या भी दूर हो गई।
अमित एस_AND_TITLE
फरवरी 2024