एक रात जब मैं अपनी दुकान से घर आया तो एक सुंदर हरे रंग की तितली मुझे अपने ड्राइंग रूम में इधर-उधर उड़ती हुई दिखाई दी। जब मैंने यह बात अपनी पत्नी को बताई तो उसने कहा कि वह दो दिन से पूरे घर में घूम रही थी, कभी रसोईघर में तो कभी अन्य कमरों में उड़कर जा रही थी। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि लगता है गुरुजी हमारे घर आने वाले हैं, और इसके कुछ समय बाद ही हमारे घर में गुरुजी के एक नहीं दो स्वरूप आ गए।
एक दिन मेरी बेटी तीन-चार सीढ़ियों से गिर गई। उसके पैर में बहुत दर्द हो रहा था, और वह बहुत परेशान भी थी। मेरे मन में आया कि मैं उसके पैरों पर थोड़ा सा गुरूजी का पवित्र जल प्रसाद लगा देता हूँ। मैंने रात को उसके पैर में जल लगाकर उसे सुला दिया। अगले दिन उसके पैर का दर्द पूरी तरह से ठीक हो गया। यह सब गुरुजी की ही कृपा है। उनके जल प्रसाद, चाय प्रसाद और लंगर प्रसाद में इतनी शक्ति है कि जो भी इन्हें ग्रहण करता है, वह सदैव सुखी रहता है। गुरुजी हमेशा हमारे साथ रहते हैं और अपने बच्चों का सदैव ध्यान रखते हैं। गुरूजी इसी तरह संगत पर अपनी कृपा बरसाते रहें।
ॐ नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय।।
ॐ नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय।।
अनिल आहूजा, एक भक्त
जुलाई 2024