गुरूजी ने मुझे नया जीवन दिया

एक भक्त, अप्रैल 2012 English
एक सुबह मैंने गुरूजी के आगे माथा टेक कर उनकी अनंत कृपा के लिए उनका धन्यवाद किया – जैसे कि मेरी प्रतिदिन की दिनचर्या होती है – और मैं सैर के लिए जाने लगी कि मुझे चक्कर आया और जंगला पकड़ कर मुझे खुद को गिरने से बचाना पड़ा। करीब एक हफ्ते से मैं थोड़ी अस्वस्थ महसूस कर रही थी किन्तु मुझे लगा था कि यह मेरे स्पॉन्डिलाइटिस और घर में काम की अधिकता के कारण हो रहा था, क्योंकि मेरी काम करने वाली लम्बी छुट्टी पर गई हुई थी। मैं धीरे-धीरे चल कर घर वापस गई और मैंने मिश्री और इलायची प्रसाद खाया जो मुझे गुरूजी से मिला था और बैठ गई। मैंने कुछ देर के लिए बेहतर लगा किन्तु पुनः मुझे चक्कर आया और मेरा हृदय बैठा जा रहा था। क्योंकि मुझे मधुमेह है, मुझे लगा कि शायद मेरी रक्त शर्करा की मात्रा कम हो गई थी और मैंने तुरंत नाश्ता किया लेकिन मेरी बेचैनी फिर भी कम नहीं हुई।

मैंने गुरूजी की तस्वीर की ओर देखा तो मुझे धयान आया कि मुझे अपनी नब्ज (पल्स) नापनी चाहिए और वो 40 प्रति मिनट थी। ईश्वर की कृपा थी कि मेरे पति जो सामान्यतः गोल्फ खेलने गए होते थे, उस समय घर पर थे और मैंने उनसे अस्पताल ले जाने को कहा और मैं बेहोश हो गई।

दो पड़ोसियों की मदद से, जो मानो हमारी ही मदद के लिए आस-पास थे, मेरे पति मुझे अस्पताल लेकर गए जो हमारे घर से करीब चार किलोमीटर दूर था। हमारे साथ जो दो पड़ोसी थे, उनमें से एक के पास अस्पताल का आपातकालीन नंबर था और दूसरे को वहाँ तक जाने का छोटा रास्ता पता था।

बाद में मुझे बताया गया कि जब हम अस्पताल पहुँचे तो मैंने अपने हाथ में गुरूजी का लॉकेट पकड़ा हुआ था, जोकि मैं हमेशा पहन कर रखती हूँ। हृदय रोग विशेषज्ञ ने मेरी नब्ज 20 प्रति मिनट पाई जो बहुत ही कम थी और यह मेरी अच्छी किस्मत थी कि मैं बच गई थी। मेरे परीक्षण का मूल्यांकन "पूर्ण हृदय अवरोध" (पूरी तरह से हृदय ब्लॉक) था। अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो मेरा बचना असंभव था। शाम तक मेरे हृदय में पेसमेकर लगा दिया गया।

एक हफ्ते बाद मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल गई और मैं वहाँ से सीधे बड़े मंदिर गुरूजी का धन्यवाद करने गई कि उन्होंने मुझे नया जीवन प्रदान किया। जय गुरूजी ! मैं बस यही चाहती हूँ कि हम सदैव उनकी कृपा की छत्रछाया में रहें।

एक भक्त

अप्रैल 2012