तीस वर्षों की पीड़ा का अंत

एक भक्त, जनवरी 2012 English
मैं पिछले तीस वर्षों से मुँह में नासूर के घावों से पीड़ित था। मैंने एलोपैथी, आयुर्वेद और होमियोपैथी सभी उपाय कर लिए थे, किंतु किसी से कोई लाभ नहीं हुआ।

मैंने गुरूजी महाराज के बारे में सुना था किंतु मुझे यह नहीं पता था कि उनके द्वार तक कैसे जाऊँ। वर्ष 2010 में मुझे गुरूजी महाराज से संबंधित वेबसाइट का पता चला, जिसमें गुरूजी के बड़े मंदिर तक पहुँचने का निर्देशित मार्ग, मानचित्र और अन्य जानकारी उपलब्ध थी। जिसकी सहायता से अगले ही दिन मैं बड़े मंदिर पहुँच गया। मैं मंदिर में तीन घंटे रहा और मैंने गुरूजी से प्रार्थना की कि वह मेरे मुँह के दर्दनाक घावों को ठीक कर दें।

जैसे कि सभी को ज्ञात है, कई बार गुरूजी किसी अन्य के माध्यम से भी आपका कल्याण करते हैं। ऐसा ही कुछ मेरा भी अनुभव रहा, जब दो दिन के उपरांत मैं अपने एक मित्र से मिलने उसके कार्यालय गया। वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ बैठा हुआ था, जो मेरे लिए अपरिचित था। जब मेरे मित्र ने मुझे चाय पीने को बोला तो मैंने अपने मुँह के घावों के विषय में बताते हुए चाय पीने से मना कर दिया। ये शायद गुरूजी की इच्छा थी – कि मेरे दोस्त के साथ बैठा हुआ वह व्यक्ति एक नैचुरोपैथी औषधि के बारे में जानता था, जिसका उपयोग एक महीने तक करना था। उसके कहे अनुसार मैंने वो उपचार शुरू कर दिया।

और आज मैं बिलकुल ठीक हूँ। जोकि एक चमत्कार से कम नहीं है।

मैं गुरूजी का आभारी हूँ जिन्होंने मुझे ठीक किया। उनके ही आशीर्वाद से मैंने यह औषधि और बहुत से लोगों तक पहुँचाई है जो इसी बीमारी से पीड़ित थे और वह सभी उससे लाभान्वित भी हुए हैं।

जय गुरूजी!

एक भक्त

जनवरी 2012