गुरूजी ने असफलता को सफलता में बदला

कार्तिका अहूजा, जनवरी 2012 English
मैंने अपनी( बैचलर) स्नातक की पढ़ाई बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी विषय में करी। जबकि मैं गणित विषय में कभी अच्छी नहीं रही, और यह एक बहुत ही कठिन विषय भी है। तृतीय अर्ध-वार्षिक परीक्षा में गणित को लेकर मैं बहुत चिंतित थी और परीक्षा से एक रात पहले मुझे पूरा विश्वास था कि मैं उतीर्ण नहीं हो पाऊँगी। मैंने गुरूजी से प्रार्थना की कि वे मुझे किसी तरह परीक्षा उत्तीर्ण करने में मदद करें।

अगले दिन, परीक्षा में प्रश्नपत्र देखकर मैं बहुत चकित हुई क्योंकि वह बहुत आसान था। मैंने सभी सवालों के जवाब बहुत आराम से दिए और मुझे लगा कि मैं आराम से उत्तीर्ण भी हो जाऊँगी। घर पहुँचकर मैंने अपनी बहन से (जोकि मेरी ही यूनिवर्सिटी के एक दूसरे कॉलेज में लेक्चरर है) फोन पर बात की और बड़े विश्वास के साथ उससे कहा कि मेरी परीक्षा अच्छी हुई, किन्तु उसे विश्वास नहीं हुआ। वह बोली कि उसने प्रश्नपत्र देखा था जोकि बहुत कठिन था और उसे नहीं लग रहा था कि मैं सफल हो पाऊँगी।

किन्तु जब घर आकर उसने प्रश्नपत्र देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि मुझे जो प्रश्नपत्र मिला था वह उसके कॉलेज में दिए गए प्रश्नपत्र से बिलकुल अलग था!

जल्द ही हमें पता चला कि गलती से हमारे कॉलेज में बैचलर ऑफ साइंस कोर्स का प्रश्नपत्र दिया गया था। मेरी यूनिवर्सिटी में जो 8 कॉलेज हैं, उनमें से केवल मेरे कॉलेज में यह प्रश्नपत्र गलती से दिया गया था और हमारे अंक उसी पर लगाए गए।

सब चकित थे: ऐसा कैसे हो सकता था? मुझे पूरा विश्वास था कि यह गुरूजी ने किया था और गुरूजी की कृपा से मैं इस परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुई।

उनकी कृपा का एक और सत्संग है।

कॉलेज में, हर अर्ध वार्षिक पाठ्यक्रम के अंत में बाहर से परीक्षक आकर परीक्षा लेते हैं। मेरे पाँचवे अर्ध-वार्षिक परीक्षा में मुझे विद्यालय की लैब में बैठकर कम्प्यूटर ग्राफिक्स का प्रैक्टिकल करना था। जब मेरी बारी आई, मेरे दो सहपाठी और मैं बिना परीक्षक की आज्ञा लिए अंदर आकर बैठ गए। परीक्षक ने गुस्सा होकर हमें बाहर निकाल दिया और हम सबको फेल कर दिया। हमारे माफी माँगने पर वह मान गया पर उसने हमें अन्य छात्रों का प्रैक्टिकल समाप्त होने तक प्रतीक्षा करने को कहा। मैंने 50 बच्चों का प्रैक्टिकल खत्म होने तक इंतज़ार किया।

इस अवधि में मैं "ॐ नमः शिवाय, शिवजी सदा सहाय; ॐ नमः शिवाय, गुरूजी सदा सहाय" जपती रही। अन्त में हमें लैब में बुलाया गया और ठंडे दिमाग और बिना किसी पक्षपात के, उस परीक्षक ने हमारी मौखिक परीक्षा ली। मैंने चुपके से अपनी मार्कशीट देखी तो पाया कि मुझे 50 में से 48 अंक मिले थे जबकि कुछ घंटे पहले ही उसने हमें फेल कर दिया था।

एक बार फिर गुरूजी ने मुझे बचा लिया था। मेरी गुरूजी से यही प्रार्थना है कि वे सदा मेरे और मेरे परिवार के साथ रहें और अपनी सारी संगत को आशीर्वाद देते रहें। जय गुरूजी!

कार्तिका अहूजा, एक भक्त

जनवरी 2012