कभी-कभी हमारी परेशानियाँ अप्रत्यक्ष कृपादन में बदल जाती हैं। साल 2009 में मेरा परिवार कठिन समय का सामना कर रहा था और जिसका अंत ही नहीं हो रहा था। एक के बाद एक परेशानी झेलते हुए हम पूरी तरह से मायूस और दुःखी जीवन व्यतीत कर रहे थे।
सितम्बर 2009 में हमने अपना घर बदला और हम सेक्टर 56, गुड़गाँव में जलवायु टावर में रहने लगे। एक परिवार जिनको हम जानते थे, हमारे पड़ोसी थे और उन्होंने मेरी पत्नी को गुरुजी और बड़े मंदिर के बारे में बताया। वे बार-बार मेरी पत्नी को मंदिर चलने के लिए कहते, और ऐसे ही एक साप्ताहिक दर्शन के समय मेरी पत्नी उनके साथ संगत में गई।
मैं विदेश में रहता था और मेरी पत्नी ने अपना अनुभव मुझे फोन पर बताया। वह बोली कि वहाँ का वातावरण शान्त और आनंदमय था, और मंदिर में उसने संतोष का अनुभव किया।
जब मैं अपनी सालाना छुट्टी पर घर आया तो संगत के दिन मुझे अपने पड़ोसियों के साथ मंदिर जाने का अवसर प्राप्त हुआ। मैंने निर्देशों का पालन किया और जैसा मुझे कहा गया वैसा किया। परिवार और स्वास्थ्य को लेकर मैं चिन्तित था और इन कभी ना खत्म होने वाली परेशानियों से हमारी रक्षा करने के लिए मैंने गुरुजी से प्रार्थना की। मैं बहुत भावुक हो गया। गुरुजी अपने भक्तों को दुःखी या परेशान नहीं देख सकते हैं। भगवान शिवजी के आगे माथा टेकते हुए मुझे गुरुजी की सुगंध का आशीर्वाद मिला। संगत हॉल शान्ति और परम आनंद से भरा हुआ था। संगत के साथ मैंने चाय प्रसाद और लंगर का आनंद उठाया और गुरुजी के चरण कमलों की कृपालु शरण की ओर अपनी यात्रा आरम्भ की।
गुरुजी महाराज के कृपालु आशीर्वाद से मैं एक नयी गाड़ी खरीद पाया और इस तरह नवम्बर 2010 में अपनी सालाना छुट्टी में नियमित रूप से बड़े मंदिर जाने लगा। यह हमारी सबसे अभिलषित मनोकामना थी (और अब भी है) कि हम मंदिर में सेवा करें। बिना किसी विलम्ब के गुरुजी ने हमारी इच्छा पूरी की, और हम हर रविवार सेवा करने लगे।
जल्द ही मेरी छुट्टी का आखरी दिन आ गया। रविवार का दिन था और सेवा करते हुए मैं यह सोचकर दुःखी हो रहा था कि उस शाम मुझे जाना था -- वो भी एक साल के लिए। अब मुझे सेवा करने का मौका कैसे मिलेगा? नौकरी के साथ-साथ मैं सेवा भी करना चाहता था पर ऐसी कोई सम्भावना मुझे दिखाई नहीं दे रही थी। पर गुरुजी की दृष्टि को कोई सीमा बंधन नहीं हैं।
मैं एक बेहतर नौकरी की तलाश में था -- एक ऐसी नौकरी जिस से मुझे बेहतर जीविका का अवसर मिले और वह मेरे मन की इच्छा में बाधा भी ना बने। यू ए ई की एक सरकारी ऑयल कम्पनी में हेल्थ और सेफ्टी इंजीनियर की नौकरी की चयन प्रक्रिया में सफल रहा। मेरे मालिक ने उनके साथ काम करने के लिए मुझे अनुमति दे दी किन्तु मैं यह जान कर निराश हो गया कि वो कम्पनी एक स्थानीय उम्मीदवार को लेने का विचार कर रही थी। यह सोच कर कि अब मुझे हर छः महीनों में छुट्टी नहीं मिलेगी, मैं अत्यंत निरुत्साहित हो गया। पर अपने भक्त के लिए गुरुजी ने इससे भी कुछ अच्छा सोचकर रखा हुआ था।
10 मार्च 2011 को यू ए ई की एक और ऑयल और गैस कम्पनी में स्पेशलिस्ट की पद के लिए मेरी उपलब्धता जानने के लिए मुझे एक रिक्रूटमेंट कम्पनी से बुलावा आया। इस नौकरी की सबसे अच्छी बात यह थी कि मैं यह नौकरी 35 से 28 दिनों की रोटेशन साइकिल में कर सकता था। इससे मैं मंदिर में एक महीने के अन्तराल में सेवा भी कर सकता था ! ऐसा कुछ प्रबंध सोच पाना मेरे लिए तो असंभव था। पर गुरुजी के लिए असंभव जैसा कोई शब्द नहीं है। हमें खुशियाँ देने के लिए वे हमारा भाग्य बदल कर दोबारा लिखते हैं। हमारी झोलियाँ छोटी हैं; श्री गुरुजी की बक्शीशें कभी ना खत्म होने वाली हैं।
मैं यह चाहता हूँ कि हर कोई, चाहे वो कहीं भी हो, सदा उनकी शरण में रहे। जय गुरुजी !
राज सिंह, एक भक्त
जुलाई 2011