दो साल पहले मैं बहुत कठिन समय का सामना कर रही थी। मैं एक बहुत कष्टदायक रिश्ते में थी जिस कारण एक रात मैं फूट-फूट कर रो रही थी। मेरे पिताजी मेरे कमरे में आए और उन्होंने मुझे गुरुजी की एक किताब दी। वह पढ़कर मैं शान्त महसूस करने लगी। उस रात, सोते समय मैंने गुरुजी का स्वरूप अपने पास रखा। बहुत रातें मैंने रोते हुए और गुरुजी से प्रार्थना करते हुए निकालीं कि वे मुझे इस अपमानजनक रिश्ते से बचायें। गुरुजी की कृपा से, आज वह व्यक्ति मेरे जीवन का हिस्सा नहीं है। यह है गुरुजी की शक्ति। बस एक बार सच्चे मन से उन्हें पुकारने की आवश्यकता है; वह निश्चित रूप से सुनते हैं।
कुछ समय बाद मुझ में अहंकार आ गया। उसके लिए मुझे गुरुजी से हज़ारों बार माफी माँगनी होगी। मैंने गुरुजी पर संदेह किया, और उससे भी बुरी बात यह थी कि मेरे कारण पिताजी ने उनमें श्रद्धा खो दी।
पर हम भले ही गुरुजी को छोड़ दें, वह हमेशा हमारे साथ होते हैं।
गुरुजी ने मेरी सहायता तब भी की जब मैं अपने व्यवसाय और रिश्ते को लेकर दोबारा परेशान थी। मैं बता नहीं सकती कि मैं कितनी अशान्त थी: मैं अपने आप को मार देना चाहती थी। यद्यपि मुझे गुरुजी में श्रद्धा नहीं रही थी, कई बार मैं उनको पुकारती, उनका नाम लेती। और आज, मैं बिलकुल ठीक, सुरक्षित और खुश हूँ। गुरुजी के आशीर्वाद से आज मेरे पास एक बहुत अच्छी नौकरी और रिश्ता है। मैं आपसे प्यार करती हूँ, गुरुजी!
जब मैं अपने रिश्ते को और मज़बूती और सहजता से पनपते हुए देखती हूँ तो बहुत हैरान होती हूँ। और मुझे पूरा विश्वास है कि गुरुजी मेरे भविष्य का भी धयान रखेंगे।
कई बार, रात को मुझे भगवान शिव की परिकल्पना दिखी है। पहले मैं इन दर्शनों का महत्त्व समझ नहीं पायी। आज मैं जानती हूँ कि वह गुरुजी ही थे जो मेरी सहायता कर रहे थे। मैं उनसे बहुत प्रेम करती हूँ; वह मेरे प्यारे पिता हैं।
शेफाली भटनागर, एक भक्त
जुलाई 2011